अकरम आज़ाद की ओर से दायर द्वितीय अपील पर आयोग ने,बहराइच ट्रामा सेंटर के उपकरणों की खरीद का ब्योरा न मिलने पर सीएमओ के खिलाफ राज्य सूचना आयोग।

अकरम आज़ाद की ओर से दायर द्वितीय अपील पर आयोग ने।


बहराइच ट्रामा सेंटर के उपकरणों की खरीद का ब्योरा न मिलने पर सीएमओ के खिलाफ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील।



वर्ष 2019 में पांच ट्रामा सेंटरों के लिए ₹15.09 करोड़ की शासन से मिली थी स्वीकृति, बहराइच के हिस्से में ₹3.01 करोड़; 27 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे होगी सुनवाई।



रिपोर्ट, ज़की सिद्दीकी, J9भारत समाचार 


बहराइच। बहराइच जिला चिकित्सालय स्थित ट्रामा सेंटर को क्रियाशील बनाने के लिए वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से स्वीकृत धनराशि से उपकरणों की खरीद और उनसे संबंधित अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध न कराए जाने का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग, लखनऊ पहुंच गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत अपीलकर्ता अकरम आज़ाद की ओर से दायर द्वितीय अपील पर आयोग ने सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर 2026 की तिथि निर्धारित की है। मामले में संबंधित जन सूचना अधिकारी एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से लिखित पक्ष प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई है। प्राप्त शासनादेश एवं राज्य सूचना आयोग के नोटिस से संबंधित अभिलेखों के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग-6 ने प्रदेश के पांच ट्रामा सेंटरों को क्रियाशील बनाने के लिए उपकरणों की खरीद के संबंध में प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की थी। शासनादेश में प्रति ट्रामा सेंटर जीएसटी सहित 3 करोड़ 1 लाख 88 हजार 58 रुपये की धनराशि स्वीकृत किए जाने का उल्लेख है। पांचों ट्रामा सेंटरों के लिए कुल स्वीकृत धनराशि 15 करोड़ 9 लाख 40 हजार 290 रुपये थी। इस योजना में बहराइच का ट्रामा सेंटर भी शामिल था।


**शासनादेश में सचिव ने महानिदेशक को दिए थे निर्देश**

उपलब्ध शासनादेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग-6 से जारी पत्र संख्या 268/2018/2725/पाँच-6-19-96 (जी0)/18 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को संबोधित करते हुए ट्रामा सेंटरों को क्रियाशील बनाने के लिए उपकरणों की खरीद से संबंधित वित्तीय स्वीकृति का उल्लेख किया गया है। पत्र पर सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के हस्ताक्षर का उल्लेख है। उपलब्ध प्रति में शासनादेश की तारीख 21 मार्च 2019 दर्ज है, जबकि उसमें संदर्भित महानिदेशक के पत्र की तारीख 22 मई 2019 लिखी है। इन तारीखों के क्रम में मूल अभिलेख से पुष्टि आवश्यक है। शासनादेश में तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय, इलाहाबाद; बहराइच; लालगंज अझारा, प्रतापगढ़; रानीगंज, प्रतापगढ़ तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र औराई, संत रविदास नगर सहित पांच ट्रामा सेंटरों का उल्लेख किया गया है।उपकरणों की खरीद उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से किए जाने का निर्देश था। साथ ही स्वीकृत धनराशि को आवश्यकतानुसार नियमानुसार कॉरपोरेशन को हस्तांतरित करने की जिम्मेदारी महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को सौंपी गई थी। 


**खरीद से लेकर उपयोगिता प्रमाणपत्र तक तय थीं शर्तें।**


शासनादेश में उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय हस्तपुस्तिका, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की क्रय नीति तथा संबंधित शासनादेशों और नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए थे। यह भी स्पष्ट किया गया था कि खरीदे जाने वाले उपकरण अस्पताल में उपलब्ध शैयाओं के मानकों के अनुरूप हों। मानकों से इतर उपकरणों की खरीद की स्थिति में संबंधित विभागाध्यक्ष अथवा क्रय अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित की गई थी। इसके अतिरिक्त, नए उपकरण स्थापित करने से पहले पुराने उपकरणों को नियमानुसार निष्प्रयोज्य घोषित कर उनका निस्तारण करने, उससे प्राप्त धनराशि राजकीय कोष में जमा कराने, उपकरणों की आपूर्ति की तिथि से लॉगबुक बनाए रखने तथा उनकी क्षमता और उपयोग का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की शर्तें शामिल थीं। उपकरणों के बेहतर उपयोग के लिए दक्ष मानव संसाधन तथा पर्याप्त स्थान की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे। शासनादेश में यह भी कहा गया था कि स्वीकृत धनराशि को किसी अन्य उद्देश्य में खर्च नहीं किया जाएगा, उसे पीएलए, बैंक अथवा डाकघर में नहीं रखा जाएगा और निर्धारित वित्तीय वर्ष में खर्च किया जाएगा। शेष धनराशि राजकोष में जमा करने तथा खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई थी।


**आरटीआई आवेदन से द्वितीय अपील तक पहुंचा मामला**


राज्य सूचना आयोग के नोटिस के अनुसार, अपीलकर्ता अकरम आज़ाद, पुत्र आज़ाद अहमद, निवासी लखनऊ ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आयोग के नोटिस में मूल आवेदन की तारीख 9 फरवरी 2026 तथा द्वितीय अपील की तारीख 7 सितंबर 2026 दर्ज है। अपील को आयोग में पंजीकृत कर लिया गया है।

आयोग की ओर से जारी नोटिस में नोटिस संख्या 202610511N100004, केस संख्या S11/A/1949/2026 तथा पंजीकरण संख्या A-20260900677 का उल्लेख है। नोटिस दिनांक 17 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है। यह मामला सुनवाई कक्ष संख्या एस-11 के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। नोटिस में जन सूचना अधिकारी के रूप में डॉ. संजय कुमार शर्मा, जन सूचना अधिकारी/मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय/ट्रामा सेंटर, बहराइच का विवरण दर्ज है। प्रथम अपीलीय अधिकारी के संबंध में एडी, देवीपाटन मंडल, गोंडा का कार्यालय अंकित है।


**27 अक्टूबर को होगी सुनवाई, लिखित पक्ष देने के निर्देश**


उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे अपना लिखित कथन सुनवाई की निर्धारित तिथि से दो दिन पूर्व ईमेल-hearingcourts11.upic@up.gov.in अथवा आयोग के विभागीय पोर्टल https://upsic.up.gov.in/ के माध्यम से स्कैन की हुई पीडीएफ फाइल में राज्य सूचना आयुक्त, सुनवाई कक्ष संख्या एस-11 के समक्ष भेजें। नोटिस में आयोग को भौतिक रूप से पत्र भेजने के बजाय निर्धारित माध्यम का इस्तेमाल करने का निर्देश भी दिया गया है। संबंधित अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की गई है कि लिखित कथन की एक प्रति अपीलकर्ता को ईमेल के माध्यम से और ईमेल संभव न होने पर व्हाट्सऐप अथवा भौतिक प्रति के रूप में उपलब्ध कराई जाए। निर्धारित तिथि पर स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।अपीलकर्ता को भी सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने तथा विपक्षी की ओर से प्रस्तुत लिखित कथन पर कोई आपत्ति होने पर आयोग के समक्ष रखने का अवसर दिया गया है। अब 27 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण रहेगा कि बहराइच ट्रामा सेंटर के लिए स्वीकृत धनराशि से खरीदे गए उपकरणों के संबंध में मांगी गई सूचनाओं और संबंधित अभिलेखों पर विभाग की ओर से क्या पक्ष प्रस्तुत किया जाता है। फिलहाल उपलब्ध नोटिस में सुनवाई निर्धारित किए जाने का उल्लेख है; आयोग के अंतिम निर्णय अथवा किसी अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है।

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